व्यूज की भूख- वह मदद करने आई थी, हमने बना दिया ‘रशियन दुल्हनिया’

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ब्रिटेन की स्वयंसेवी संस्था Shivia की छह सदस्यीय टीम के गांव दौरे का वीडियो लोगों ने सोशल मीडिया पर भागलपुर की प्रेम कहानी बताकर वायरल कर दिया, सच्चाई जाने बगैर कई बड़े मीडिया संस्थानों ने भी इसे चला दिया. क्या है पूरी सच्चाई और व्यूज की भूख क्यों खतरनाक है?

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एक विदेशी महिला बिहार के गांवों में महिलाओं की आजीविका और रोजगार के अवसरों को समझने आती है. ग्रामीण महिलाएं उसका स्वागत करती हैं. वह उनके घर जाती है, उनके कामकाज को देखती है और स्थानीय संस्था के साथ चल रहे कार्यक्रमों की जानकारी लेती है. इस पूरी गतिविधि का वीडियो बनाया जाता है.

लेकिन कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर यही दृश्य एक दूसरी कहानी के साथ सामने आता है. महिला को रूस की रहने वाली जूली बताया जाता है. युवक का नाम राहुल यादव और जगह भागलपुर का राजापुर गांव बताया जाता है. दावा किया जाने लगता है कि विदेशी युवती अपने प्रेमी से मिलने बिहार आई है और दोनों की शादी होने वाली है.

यह कहानी जितनी तेजी से फैली, उतनी ही तेजी से इसकी वास्तविक पृष्ठभूमि भी सवालों के घेरे में आई. कई मीडिया हाउस और यू-ट्यूब चैनलों ने इस वीडियो को बिना सच्चाई जाने ज्यों का त्यों चला दिया. मगर सच्चाई अलग ही थी. उपलब्ध रिपोर्टों और संबंधित लोगों के बयानों के अनुसार, यह घटना भागलपुर की नहीं, पूर्णिया जिले की है. महिला ब्रिटेन की संस्था Shivia से जुड़ी एंड्रिया कॉनॉली हैं और वीडियो में दिख रहा युवक पूर्णिया का नमित कुमार है.

इस दृश्य को गलत संदर्भों के साथ आगे बढ़ाया गया.

छह महिलाओं की टीम क्यों आई थी पूर्णिया?

ब्रिटेन में पंजीकृत संस्था Shivia भारत में ग्रामीण और शहरी गरीब समुदायों, खासकर महिलाओं, के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाने का काम करती है. इसका उद्देश्य लोगों को ऐसे साधन, प्रशिक्षण और सहयोग उपलब्ध कराना है, जिनसे वे अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें और परिवार की आमदनी बढ़ा सकें.

खेती को लाभकारी बनाने, मुर्गीपालन, बकरीपालन और मछलीपालन के अलावा संस्था महिलाओं को कुकिंग और ब्यूटी के क्षेत्र में भी स्वरोजगार के लिए तैयार करती है. भारत में इसके कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए Shivia Livelihoods Foundation की स्थापना 2020 में मुंबई में हुई थी. संस्था स्थानीय संगठनों के साथ मिलकर काम करती है.

7 और 8 अक्टूबर 2026 को Shivia की छह सदस्यीय महिला टीम पूर्णिया पहुंची थी. टीम में शामिल थीं- ओलिविया बेल्चर, विक्टोरिया डेनिसन, सियोभान कॉफी, एंड्रिया कॉनॉली, बेथन थॉमसन और एरिन फिंगलैंड. इनमें ओलिविया बेल्चर संस्था की संस्थापक और सीईओ है.

टीम स्थानीय संस्था साथी के सहयोग से चल रहे आजीविका कार्यक्रमों को समझने आई थी. इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आमदनी, पशुपालन की चुनौतियों और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को करीब से जानना था.

टीम ने मोहनी, यबनपुर, मरोचा, लखना और कसबा नगर परिषद क्षेत्र के बरेटा गांव का दौरा किया. ग्रामीण परिवारों से बातचीत के दौरान चारा-पोषण, पशु स्वास्थ्य, बाजार तक पहुंच, पशुपालन में लगने वाले श्रम और उससे होने वाली आमदनी जैसे विषयों पर जानकारी ली गई. स्थानीय जीवन और जनजातीय संस्कृति को समझना भी इस दौरे का हिस्सा था. इस संबंध में नौ अक्तूबर को दैनिक भास्कर अखबार में एक रिपोर्ट भी छपी है.

इस कार्यक्रम का एक अहम पहलू बकरीपालन के जरिए आजीविका के अवसरों का विस्तार करना था. कार्यक्रम के तहत 20 बकरीपालक परिवारों की पहली मादा संतान यानी पाठी 20 नये लाभार्थी परिवारों को सौंपी जानी थी, ताकि उन्हें भी पशुपालन के माध्यम से आमदनी शुरू करने का अवसर मिल सके.

यानी जिस यात्रा का वीडियो बाद में प्रेम कहानी के नाम पर वायरल हुआ, उसकी वास्तविक पृष्ठभूमि ग्रामीण महिलाओं की आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़ी थी.

पूर्णिया के गढ़बनैली के आयोजन की तसवीर, इसमें शिविया और साथी दोनों संस्थाओं के लोग मौजूद हैं

वीडियो वायरल करने वाले ने क्या बताया?

पूर्णिया जिले के कसबा थाना क्षेत्र के सौठा निवासी नमित कुमार को इस कार्यक्रम की शूटिंग के लिए एक स्थानीय एनजीओ ने कैमरामैन के तौर पर काम दिया था. नमित ने कार्यक्रम की गतिविधियों का वीडियो बनाया और अपने निजी इंस्टाग्राम अकाउंट ‘नमित भाई’ पर अपलोड किया. उनका कहना है कि उन्होंने वीडियो के साथ कोई भ्रामक विवरण नहीं लिखा था और न ही इसे प्रेम कहानी के रूप में पेश किया था.

उनके मुताबिक, बाद में वीडियो को दूसरे संदर्भ में प्रसारित किया जाने लगा. इससे घटना की वास्तविक पृष्ठभूमि को लेकर भ्रम पैदा हुआ.

सच्चाई जो भी हो, लेकिन एक बात स्पष्ट है: वायरल कहानी में जगह, युवक का नाम और महिला की राष्ट्रीयता तक बदल गई. पूर्णिया के कार्यक्रम को भागलपुर के राजापुर गांव की घटना बताया गया और ब्रिटिश संस्था से जुड़ी महिला को रूसी युवती के रूप में पेश किया गया.

पूरे आयोजन की खबर दैनिक भास्कर के पूर्णिया संस्करण में छपी थी

वीडियो के साथ उसकी असली कहानी क्यों गायब हो गई?

सोशल मीडिया पर छोटे वीडियो अक्सर अपने मूल संदर्भ से काटकर प्रसारित किये जाते हैं. किसी मुलाकात, स्वागत समारोह या सामान्य बातचीत का दृश्य नये कैप्शन के साथ साझा किया जाता है. मकसद सिर्फ व्यूज बटोरना होता है. उसके बाद लोग उस कैप्शन को ही घटना की सच्चाई मानने लगते हैं.

इस मामले में भी यही हुआ- लोगों ने वीडियो के मूल स्रोत और उसमें दिख रहे लोगों की पहचान की जांच किये बगैर पहले से चल रहे दावे को ही आगे बढ़ा दिया. वीडियो वायरल हुआ और हर जगह उसे नये संदर्भ में देखा जाने लगा. कई मीडिया संस्थानों को इस कहानी में वायरल होने का तत्व नजर आया.

अगर सच समझना चाहते हैं तो Shivia के फेसबुक पेज पर टीम के दौरे का पूरा वीडियो उपलब्ध है. इससे पूरे दौरे को देखा और घटना का संदर्भ समझना जा सकता है. अलग-अलग छोटे क्लिप और उनके साथ लगाए गए दावों के बजाय मूल वीडियो तथा कार्यक्रम की जानकारी को साथ रखकर देखना जरूरी है.

पूर्णिया में संस्था की संस्थापक सीईओ ओलिविया बेल्चर.

न्यूज मीडिया की जिम्मेदारी भी कम नहीं

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली सामग्री को समाचार संस्थानों तक पहुंचने में देर नहीं लगती. लेकिन किसी वीडियो का लोकप्रिय होना और उसका सही होना दो अलग बातें हैं.

इस मामले में यह जांचना जरूरी है कि किन समाचार संस्थानों ने कथित प्रेम कहानी को किस रूप में प्रसारित किया. क्या उन्होंने इसे केवल सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे के तौर पर दिखाया, क्या उस दावे की स्वतंत्र पुष्टि की, और वास्तविक जानकारी सामने आने के बाद क्या उन्होंने सुधार या फैक्ट-चेक प्रकाशित किया?

NDTV सहित कुछ मीडिया संस्थानों ने 14 अक्टूबर को इस वायरल दावे की पड़ताल प्रकाशित की. इन रिपोर्टों में महिला की पहचान एंड्रिया कॉनॉली और घटना का स्थान पूर्णिया बताया गया. इस तरह शुरुआती वायरल कहानी और बाद में सामने आए तथ्यों के बीच का अंतर स्पष्ट हुआ. मगर तब तक भारत घूमने और भारतीयों की मदद करने आई एक महिला को हमारे सोशल मीडिया ने अलग ही रूप दे दिया था, जो निश्चित तौर पर शर्मनाक है.

शिविया का पक्ष

नोट- जब इस मसले पर प्रतिक्रिया के लिए हमने संस्था के मुंबई ऑफिस में फोन किया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि खबर झूठी है और हम इस मसले पर टिप्पणी नहीं करना चाहते.

1 ने “व्यूज की भूख- वह मदद करने आई थी, हमने बना दिया ‘रशियन दुल्हनिया’” पर विचार किया;

  1. सोशल मीडिया पर इस तरह की हजारों कंटेंट पड़े हैं। झूठ का खजाना। उद्देश्य केवल एक, व्यूज और मॉनिटाइजेशन। पैसे के लिए ये क्रिएटर्स गिद्ध तक बन जा रहे हैं। आपने सही पड़ताल की। प्रणाम।

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