कहीं हार में गरिमा, कहीं जीत का इंतजार और कहीं काले रसगुल्लों की दावत
बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बीच राजनीति के कई रोचक और जमीनी दृश्य सामने आए। सीनियर रिपोर्टर सीटू तिवारी ने अपने फेसबुक पेज पर चुनाव के ऐसे ही कुछ अनुभव साझा किए हैं। जहां पॉलिटिकल रिपोर्टिंग के नाम पर गॉसिप और कयासबाजियों का चलन है, वहां ऐसे जमीनी नोट्स ताजी हवा की तरह लगते हैं। उनके ये नोट्स साभार।

सर्वेश कुमार और नेता की गरिमा
विधानपरिषद चुनाव में एक नाम जो चर्चा में रहा वो था सर्वेश कुमार का.
दरभंगा स्नातक से बीजेपी के उम्मीदवार थे. इस सीट का रिजल्ट अब जाकर क्लियर हुआ है.
बीते चुनाव में सर्वेश कुमार इस सीट से निर्दलीय जीते थे. इस बार बीजेपी के टिकट पर थे.
उनके सामने थे अनिल झा जो राजद से उम्मीदवार थे और जो जानकारी मिल रही है कि चार हजार से अधिक मतों के अंतर से वो सर्वेश कुमार से जीत गए है.
चुनाव नतीजे आने से पहले ही बीजेपी और जेडीयू के कई कद्दावर नेताओं ने सर्वेश कुमार को जीत की बधाई दे दी. उनके चेहरे को उस पोस्टर में शामिल कर लिया गया जिसमें सभी जीते हुए प्रतिनिधियों के चेहरे थे. आलम ये था कि बीजेपी दरभंगा पेज को अपने लोगों से कहना पड़ा कि चुनाव परिणाम का इंतजार कीजिए, उससे पहले कोई दावा मत कीजिए.
मैनें कई दफे सर्वेश कुमार का फेसबुक पेज देखा तो वहां सन्नाटा था.
आज जब अनिल जीते और जिस तरह से सर्वेश कुमार ने उनको गले लगाकर बधाई दी, उससे समझ आया कि नेता की गरिमा क्या होती है और उसे कैसे प्रैक्टिस किया जाता है.
वैसे दरभंगा में पिछले चुनाव में भी बीजेपी नहीं थी. पिछली बार सर्वेश निर्दलीय थे और शिक्षक सीट से मदन मोहन कांग्रेस के थे.

दिलीप कुमार और राजद की चुनावी गंभीरता
बात दिलीप कुमार की.
कुछ लोग दिलीप पटेल भी कह लेंगें.
पटना स्नातक से राजद उम्मीदवार.
दिलीप कुमार 15,000 से ज्यादा वोट लाकर दूसरे नंबर पर रहे.
27 अक्टूबर को जब पटना के बांकीपुर स्कूल में कांउटिंग चल रही थी तो मतगणना स्थल से दिलीप कुमार अकेले निकले.
उनके साथ कोई नहीं था और कोई पत्रकार भी उनके पीछे मीडिया बाइट के लिए नहीं दौड़ा. उलटा जैसे ही अनुज सिंह आते जो अनंत के उम्मीदवार थे तो लोग उनके पीछे भागते.
दिलीप कुमार ने अच्छी टक्कर दी. वजह अशोक महतो का प्रभाव हो सकता है लेकिन लोकतंत्र में वोट बहुत अहम है.
राजद इस चुनाव को बहुत ही लापरवाह तरीके से ट्रीट करती रही. तेजस्वी ने खुद स्वीकारा कि इस परफारमेंस के बाद अब वो चुनाव सरियसली लेंगें.
तेजस्वी ही नहीं बल्कि सभी पार्टियां और एमएलसी चुनाव लड़ने के इच्छुक लोग तब से ही एक्टिव हो जाएगे जब अगली बार चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का नोटिफिकेशन जारी होगा.
मजबूत मतदाता सूची की वजह से ही नीरज कुमार इलेक्शन जीत पाए.
शिक्षकों का चंदा और सारण शिक्षक सीट का चुनाव
शिक्षकों ने इस चुनाव में एक उम्मीदवार को साढ़े पांच लाख का चंदा दिया.
उम्मीदवार थे सारण शिक्षक सीट से राहुल राज जिन्होने आनंद पुष्कर को हराया.
बीजेपी के समर्पित कार्यकर्ता राहुल राज लंबे समय से शिक्षकों के बीच और मतदाता सूची को लेकर काम कर रहे थे.
टिकट देने का वक्त आया तो स्वर्गीय केदार पांडेय के बेटे आनंद पुष्कर को जेडीयू ने टिकट दिया.
बीजेपी चुप तो रह गई लेकिन चुनाव से हाथ खींच लिए.
आनंद पुष्कर हारे और राहुल राज को अब बीजेपी वाले अपना ही आदमी बता रहे हैं.
अनंत सिंह के यहां चुनावी माहौल
बगैर अनंत सिंह की बात के तो ये चुनावी नोट्स ही अधूरे है.
1 मॉल रोड में घुसते ही अनंत सिंह की चार पसंदीदा गाड़ियो के दर्शन हो जाते है. दो जेडीयू नेताओं की फोटो लगी दिखती है.
ललन सिंह और निशांत कुमार.
लाखों की संख्या में बने काले रसगुल्ले खाने वालों की बाट जोह रहे थे और अगल – बगल यहां तक कि सचिवालय से आकर लोग भी दोने में बंट रहे ताजे रसगुल्लों का आनंद ले रहे थे
बाकी तो उनके यहां तरह – तरह की 40 गाय भैेस और कुल 6 घोड़े है.
सबके लिए बिजली बत्ती की टंच व्यवस्था.
मैने घोडे की देखभाल करने वाले आदमी से पूछा कि अब सरकार के आदेश के बाद तो ये आवास खाली करना होगा? घोड़े की देखभाल करने वाले के बगल में नौबतपुर से आए एक ब्राह्मण ने जवाब दिया – सरकार सबसे बड़ा गुंडा है, जब चाहे तब खाली करा ले.