वीडियो बनाया तो नौकरी गई, अब जेल में सूरत के दो एंब्रॉयडरी कारीगर, फैक्ट्री इलाके में तनाव, मालिक छुट्टी नहीं देने के लिए अड़े

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रात के वक्त थाने में मौजूद एंब्रायडरी कारीगर जगन्नाथ और रोहित

सूरत के लक्ष्मीनारायण इंडस्ट्रियल पार्क में रात साढ़े आठ बजे की शिफ्ट छूटी थी। मजदूरों के झुंड अपने अपने घर लौट रहे थे। तभी एक शोर उभरा कि दो मजदूर और दो यूनियन लीडर को पुलिस अपने साथ पकड़कर ले गई है। यह संवाददाता जो उस वक्त उन मजदूरों से बातचीत कर रहा था, खबर मिलते ही उधना पुलिस स्टेशन पहुंचा, जहां दो मजदूर ओड़िसा के जगन्नाथ और उत्तर प्रदेश के रोहित के साथ दो यूनियन लीडर अजय दुबे और मलखान सिंह मौजूद थे। साथ ही वहां टेक्सटाइल एंब्रॉयडरी जॉब वर्क एसोसिएशन ऑफ सूरत (तेजस)के पचास से अधिक लोग भी मौजूद थे।

इस संवाददाता ने जब जन्मभूमि भारत मजदूर यूनियन के अजय दुबे से पूछा कि क्या मामला है? तो उन्होंने कहा, “क्या कीजिएगा, तानाशाही है।” फिर वहां जगन्नाथ ने बताया, “मैं जिस कंपनी में काम करता हूं, वहां के मालिक साप्ताहिक छुट्टी देने के लिए राजी हो गए थे। इस बात का मैंने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल दिया। जैसे ही यह खबर मालिकों के संगठन को मिली। चालीस से पचास मालिक आकर मेरे मालिक पर दबाव डालने लगे और मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद फिर मैंने वीडियो बनाया कि मुझे नौकरी से निकाल दिया गया है। ये लोग मालिकों को समझाने आए थे कि उनलोगों के पुलिस बुला ली और हमें पकड़ कर यहां ले आया गया।”

यूनियन के लीडर अजय दुबे को सूरत पुलिस ने इसी तरह के मामले में 15 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था, 22 अक्टूबर को उन्होंने जमानत पर छोड़ा गया है। उन पर एक एंब्रॉयडरी कंपनी के मालिक से 50 हजार रुपए की रंगदारी मांगने का आरोप था। जबकि मजदूरों का कहना है कि वे मजदूरों के लिए आंदोलन का आह्वान कर रहे थे इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।

दरअसल यह किस्सा पिछले तीन महीनों से सूरत शहर के एंब्रायडरी कारखानों के मजदूरों के आंदोलन से जुड़ा है। मजदूर आठ घंटे की शिफ्ट और साप्ताहिक अवकाश की मांग कर रहे हैं और फैक्ट्री मालिकों का संगठन तेजस कह रहा है, अगर मजदूर इस सिस्टम से काम करेंगे तो उन्हें महीने में उतने दिन की ही मजदूरी मिलेगी, जितने दिन वे काम करेंगे। इसके अलावा काम के दौरान जो भी तैयार माल खराब होगा उसका आधा खर्च देना होगा, साथ ही काम के दौरान वे फैक्ट्री में मोबाइल लेकर नहीं जा सकते। मामला अटका हुआ है और मजदूर कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं।

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इस मुद्दे को विस्तार से समझने के लिए यह स्टोरी पढ़ सकते हैं।

इस बीच मजदूरों का कहना है कि वीडियो बनाने और साप्ताहिक अवकाश लेने की वजह से कई लोगों को नौकरी से हटा दिया गया है।

उस वक्त पुलिस स्टेशन में मौजूद उक्त कंपनी के मालिक भारत से जब इस संवाददाता ने मामले के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, दरअसल एक मजदूर ने मुझे गाली दी थी, “इसलिए मैने उन्हें नौकरी से निकाला। छुट्टी की कोई बात नहीं। जगन्नाथ दूसरे कंपनियों पर दबाव डालने के लिए झूठ बोल रहा है।” वहां मौजूद एक कारखाना मालिक ने उक्त वीडियो भी इस संवाददाता को दिखाया, मगर उसमें जगन्नाथ कह रहा था कि उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। एक दूसरा मजदूर गाली दे रहा था।

देर रात तक चले इस कश्मकश के बाद उधना पुलिस स्टेशन की पुलिस ने दोनों यूनियन लीडर को छोड़ दिया और दोनों मजदूरों को गिरफ्तार कर लिया गया। अगली सुबह जब यह संवाददाता उधना पुलिस स्टेशन पहुंचा तो दोनों मजदूर हाजत में थे। उन्हें पुलिस दोपहर में कोर्ट ले जाने की तैयारी में थी। जगन्नाथ ने कहा, “अगर मेरे मालिक ने मुझे निकाला होता तो दिक्कत नहीं होती। मुझे दूसरे मालिकों के दबाव में निकाला गया है।” वहीं रोहित ने कहा, “यह ठीक है कि मैंने गाली दी, मगर पहले मालिकों ने गाली दी थी।”

उस वक्त वहां थाना प्रभारी मौजूद नहीं थे। एक हेड कांस्टेबल ने फाइल देखकर सिर्फ इतना बताया कि BNS की धारा 126 और 127 इन दोनों पर लगी है और इन्हें आज दोपहर अदालत में पेश किया जाएगा। दोनों यूनियन लीडर को फिलहाल पूछताछ के बाद इस शर्त पर छोड़ा गया है कि जब नोटिस दी गई तो यहां आना होगा।

इस बीच सूरत में 55 हजार से अधिक निबंधित एंब्रायडरी कंपनियों में काम करने वाले आठ लाख से अधिक एंब्रॉयडरी कारीगरों में असुरक्षा और भय का माहौल दिखता है। पिछली शाम और अगली सुबह इस संवाददाताओं ने कई कारीगरों से ऑन कैमरा बात करने की कोशिश की। एक भी मजदूर तैयार नहीं हुआ। मजदूरों का कहना था, “मालिक लोग मीडिया या सोशल मीडिया पर किसी मजदूर को छुट्टी की बात करते देखते हैं तो उसे नौकरी से निकाल देते हैं।”

नाम न जाहिर करने की स्थिति में बिहार के नालंदा जिले के एक कारीगर ने कहा, “मैं 18 साल से उसी फैक्ट्री में काम कर रहा हूं। तब मालिक के पास दो मशीन थी, आज 30 मशीन हो गई। इसमें हमारा भी मेहनत था। मगर जब हमने हफ्ते में एक दिन की छुट्टी मांग ली तो कहने लगा, हिसाब कर लो। मैंने भी तैश में आकर कहा हिसाब कर दो हमारा। तो बोले, 15 नवंबर के बाद पैसा मिलेगा। अब आप बताओ, नौकरी छोड़कर घर जाएं और पैसा लेने 20 दिन बाद आएं। त्योहार बिना पैसों के मनाएं?”

एक मजदूर ने कहा, “हमारा मालिक छुट्टी देने के लिए तैयार है, मगर तेजस यूनियन का उस पर दबाव है। कहता है, सब देंगे तो मैं भी दूंगा।”

एक अन्य मजदूर ने कहा, “छुट्टी मांगने पर कहा जाता है एक दिन का 522 रूपये मिलेगा। और जितने दिन काम करते हो उतने दिन का ही मिलेगा। अभी 25-30 हजार रुपए कमाते हैं, चार दिन की छुट्टी में कमाई आधी हो जाएगी। क्या ऐसा होता है। दुनिया भर में हफ्ते में एक दिन छुट्टी मिलती है। यहां तो कुछ भी नहीं। न पीएफ कटता है, न ESI का फायदा मिलता है। न ज्वाइन लेटर मिला, न और कोई कागज, कोई सिस्टम नहीं। हाजिरी तक नहीं बनती। मालिक जो बोले वही सही।”

उधर मालिकों का अपना तर्क है। हरियाणा से आकर एंब्रायडरी का कारोबार करने वाले 40 से अधिक मशीनों के मालिक तेजस कहते हैं, “दिक्कत ये है कि हम मशीन बंद नहीं कर सकते। मशीन एक बार बंद हुई तो फिर दुबारा शुरू करने पर कुछ न कुछ खराबी आ जाती है। हम कैसे छुट्टी दें। वैसे भी मेरी फैक्ट्री में सारे कारीगर खुश हैं, अच्छा कमा रहे हैं।” वे फोन पर दो कारीगरों से बात भी करवाते हैं।

दरअसल सूरत का एंब्रायडरी कारोबार इस लिहाज से दिलचस्प है कि यहां ज्यादातर कारीगर भी प्रवासी हैं और बड़ी संख्या में मालिक भी। कारीगरों में सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश वालों की है, फिर बिहार और ओडिसा वालों की। फैक्ट्री मालिकों में पंजाब, हरियाणा, गुजरात के सौराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के ज्यादातर मालिक पहले मजदूर बनकर सूरत आए थे। अब उन्होंने खुद कमाई करके के कारोबार खड़ा कर लिया है। ऐसे में अब वे मालिकों की तरफ हैं। तेजस यूनियन के निर्देश के बिना कोई मालिक एक फैसला नहीं लेता और उनकी एक अपील पर दर्जनों फैक्ट्री मालिक जुट जाते हैं।

तेजस कहते हैं, कारोबार बहुत अच्छा चल रहा था, मगर यूनियन लीडरों ने सिर्फ अपने फायदे के लिए एंब्रायडरी सेक्टर का माहौल खराब कर दिया है। वे सब अपनी कमाई के लिए कर रहे हैं। यह तो हमारी यूनियन थी, जिसने हम सबको बचा लिया, नहीं तो कारोबार उजड़ जाता।

अगली दोपहर इस संवाददाता की मुलाकात तेजस के दफ्तर में उनके पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में फैक्ट्री मालिकों को नेतृत्व प्रदान करने वाले करुणेश रणपरिया से हुई। उन्होंने कहा, “दरअसल हमारी इंडस्ट्री ने मालिकों और मजदूरों का रिश्ता 25 साल से अधिक पुराना है। अब कुछ यूनियन लीडर माहौल खराब कर रहे हैं। इसलिए दिक्कत हो रही है। अगर कोई कारीगर या यूनियन लीडर किसी फैक्ट्री मालिक के साथी गालीगलौज करेगा तो वह पुलिस में जाएगा। हमारा काम मालिकों के साथ मजबूती से खड़ा रहना है। हम छुट्टी और 8 घंटे ड्यूटी का सरकारी नियम मानने के लिए तैयार हैं। मगर कारीगरों को भी हमारे नियम मानने पड़ेंगे। छुट्टी लेंगे तो 26 दिन की मजदूरी मिलेगी। माल खराब हुआ तो 50 परसेंट हर्जाना देना होगा और काम के वक्त मोबाइल जमा करके जाना होगा। हम दीवाली के बाद इसको लागू करने के लिए तैयार हैं। लेकिन मुझे लगता है कारीगर ही इसके लिए तैयार नहीं होंगें। वैसे भी अभी जो सिस्टम चल रहा है, वही बेस्ट है।”

उनके दफ्तर से बाहर निकलने पर एक छोटे से ढाबे में खाना खा रहा एक एंब्रायडरी कारीगर कहता है, “हफ्ते में एक दिन की छुट्टी तो हमें चाहिए ही। अब देखना है पुलिस के दम पर मालिक लोग इसको कब तक रोकते हैं।”

इस पूरे मसले पर जब हमने सूरत के असिस्टेंट लेबर कमिश्नर एसएस दुबे से बात की तो उन्होंने कहा, हमने नए लेबर कोड की जानकारी तेजस यूनियन को दे दी है। साथ ही वर्कर यूनियन वालों से भी कहा है कि अगर कहीं इसका पालन नहीं होता तो हमें स्पेसिफिक शिकायत करें। मगर हमें अब तक कोई भी आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।

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सूरत एम्ब्रॉयडरी मजदूर आंदोलन

प्रमुख मांगें और घटनाक्रम | सितंबर–अक्टूबर 2026

1. आंदोलन की प्रमुख मांगें

1. रोजाना आठ घंटे की शिफ्ट।

2. रविवार या सप्ताह में एक दिन सवेतन छुट्टी।

3. आठ घंटे काम करने पर आधी मजदूरी नहीं।

4.समय पर मजदूरी का भुगतान- मजदूरों को बकाया भुगतान और त्योहार के समय पैसों की उपलब्धता की चिंता है।

5.न्यूनतम मजदूरी और श्रम कानूनों का पालन।

6.पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं- मजदूरों का आरोप है कि बड़ी संख्या में कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिलता।

7.मजदूरों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की वापसी-पहले की रिपोर्टिंग में कई मजदूरों के खिलाफ मामलों को वापस लेने की मांग सामने आई थी।

8.नौकरी से निकाले जाने और दबाव की शिकायतों का समाधान- मौजूदा विवाद में मजदूरों का आरोप है कि छुट्टी की मांग करने या वीडियो बनाने पर कुछ लोगों को नौकरी से निकाला गया।

2. मालिकों की प्रमुख आपत्तियां

आठ घंटे की शिफ्ट- कम समय काम करने पर मजदूरी भी काम के दिनों या घंटों के हिसाब से देने की दलील।

साप्ताहिक छुट्टी- कुछ मालिकों का कहना है कि मशीनें लगातार चलाना जरूरी है और उन्हें बंद करने से खराबी आ सकती है।

मोबाइल फोन- काम के दौरान मोबाइल साथ रखने पर आपत्ति; मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था पर विवाद।

खराब माल- मालिकों की ओर से काम के दौरान खराब हुए माल के नुकसान का आधा खर्च मजदूरों से लेने की बात सामने आई है।

उत्पादन और कमाई-मालिकों का तर्क है कि प्रस्तावित बदलाव से उत्पादन और कारोबार प्रभावित हो सकता है।

3. आंदोलन की टाइमलाइन

अगस्त 2026 के आसपास-आठ घंटे की शिफ्ट और साप्ताहिक छुट्टी को लेकर विवाद तथा आंदोलन शुरू

13 सितंबर- सूरत के जिला कलेक्टर कार्यालय पर मजदूरों का प्रदर्शन

1 अक्टूबर-प्रस्तावित प्रदर्शन टला

2 अक्टूबर- यूनियन नेता अजय दुबे ने ‘गांव चलो’, शिकायत दर्ज कराने और रविवार को काम बंद रखने का आह्वान किया।

9 अक्टूबर- केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का सूरत दौरा। उन्होंने कहा, मालिक मजदूर एक सिक्के के दो पहलू। वामपंथियों की साजिश से उद्योग को बर्बाद नहीं होने देंगे।

15 अक्टूबर -अजय दुबे को मजदूर नेताओं की बैठक में जाते समय पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया।

13–15 अक्टूबर के आसपास- कलेक्टर कार्यालय पर धरना देने की अपील और आंदोलन को आगे बढ़ाने की कोशिश।

15 अक्टूबर – मजदूरों का सूरत कलेक्टर के ऑफिस पर प्रदर्शन। कई हिरासत में लिए गए।

22 अक्टूबर- अजय दुबे को जमानत पर रिहा किया गया।

27–28 अक्टूबर -साप्ताहिक छुट्टी के विवाद के बीच जगन्नाथ और रोहित की गिरफ्तारी; यूनियन नेता अजय दुबे और मलखान सिंह भी पुलिस स्टेशन में मौजूद।

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